Wednesday, July 23, 2014

अलविदा

 सदियाँ बीतीं मौसम गुजरे ,

उनका कोई पैगाम न था । 

जीवन की इस दौड़ में लेकिन ,

ग़म का कोई काम न था । 



वक़्त गुजरा काफी जब हुए थे जुदा वो ,

कह के हमसे कि ये आख़िरी अलविदा न हो । 


Wednesday, April 16, 2014

खोई सी अवाज़

       कल एक ढाबे पे नाश्ता करते हुए अचानक सड़क के उस और एक पेड़ से कोयल की कूक सुनाई दी। वैसे तो ताउम्र मैं ' चिड़ियाओ की मधुर आवाज, नदियों का मधुर संगीत ' जैसी बातें करने वालों की मजाक उडाता रहा हूँ मगर जब कल वो कूक मेरे कानो पे पड़ी तो मुझे इन वाक्यों में पहली बार सौंदर्य दिखाई पड़ा।