Wednesday, April 16, 2014

खोई सी अवाज़

       कल एक ढाबे पे नाश्ता करते हुए अचानक सड़क के उस और एक पेड़ से कोयल की कूक सुनाई दी। वैसे तो ताउम्र मैं ' चिड़ियाओ की मधुर आवाज, नदियों का मधुर संगीत ' जैसी बातें करने वालों की मजाक उडाता रहा हूँ मगर जब कल वो कूक मेरे कानो पे पड़ी तो मुझे इन वाक्यों में पहली बार सौंदर्य दिखाई पड़ा।